सितंबर में जीएसटी संग्रह फिर ₹2 लाख करोड़ के पार, आयात से सबसे ज़्यादा बढ़त
सितंबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 14.7% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा। इस वित्त वर्ष में यह तीसरा महीना है जब संग्रह ₹2 लाख करोड़ से ऊपर गया। आयात से राजस्व 26% और घरेलू संग्रह 10.1% बढ़ा, और विश्लेषक पिछले साल की दर कटौती के बाद के कम आधार की ओर इशारा करते हैं।
क्या बदला
- सितंबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 14.7% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
सितंबर के आँकड़े
डीडी न्यूज़ की 1 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताए गए सरकारी आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का सकल संग्रह 14.7% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
घरेलू लेन-देन से संग्रह 10.1% बढ़कर लगभग ₹1.38 लाख करोड़ रहा, जबकि आयात पर जीएसटी 26% बढ़कर ₹65,525 करोड़ हो गया। रिफ़ंड घटकर ₹27,001 करोड़ रहे। रिफ़ंड के बाद शुद्ध संग्रह 18.1% बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
अब तक का साल
सितंबर 2026-27 वित्त वर्ष का तीसरा महीना रहा जब सकल संग्रह ₹2 लाख करोड़ के पार गया; इससे पहले अप्रैल और जुलाई में ऐसा हुआ था। अप्रैल से सितंबर तक सकल संग्रह 11.6% बढ़कर ₹12.46 लाख करोड़ से ज़्यादा और शुद्ध संग्रह 10.4% बढ़कर ₹10.66 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
बढ़त का बड़ा हिस्सा आयात से
कई कर विशेषज्ञों ने आयात और घरेलू वृद्धि के अंतर पर ध्यान दिलाया। प्राइस वॉटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा कि कुल उछाल का एक अहम हिस्सा आयात से आ रहा है। ग्रांट थॉर्नटन भारत के मनोज मिश्रा ने आयात से जुड़े जीएसटी में तेज़ वृद्धि की ओर इशारा किया।
ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने कहा कि आँकड़े दिखाते हैं कि वैश्विक दबाव के बावजूद घरेलू माँग अच्छी बनी हुई है।
पिछले साल की दर कटौती का आधार प्रभाव
वृद्धि का एक हिस्सा कम आधार की वजह से है। सरकार ने 3 सितंबर 2025 को जीएसटी दरों के सरलीकरण, यानी जीएसटी 2.0, की घोषणा की और यह 22 सितंबर 2025 से लागू हुआ। बहुत से ख़रीदारों ने कम दरों का इंतज़ार किया, इसलिए सितंबर 2025 में संग्रह कमज़ोर रहा था।
टैक्स कनेक्ट एडवाइज़री सर्विसेज़ के विवेक जालान ने कहा कि जीएसटी 2.0 में दरों में भारी कटौती के बाद भी संग्रह मज़बूत रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रिफ़ंड में कमी का मतलब हो सकता है कि विभाग भुगतान रोक रहे हैं, और डेलॉयट इंडिया के महेश जयसिंह ने उलटे शुल्क ढाँचे को सुलझाने और रिफ़ंड को सरल बनाने की बात कही।
यह क्यों मायने रखता है
जीएसटी ज़्यादातर वस्तुओं और सेवाओं पर लगता है और केंद्र तथा राज्यों में बँटता है, इसलिए ये मासिक आँकड़े खपत और व्यापार की स्थिति का शुरुआती संकेत हैं, और यह भी बताते हैं कि सरकारों के पास ख़र्च के लिए कितना पैसा है। आयात से मज़बूत राजस्व और धीमी घरेलू वृद्धि ऐसा रुझान है जिस पर अर्थशास्त्री आने वाले महीनों में नज़र रखेंगे।
यह क्यों मायने रखता है
- जीएसटी राजस्व केंद्र और राज्यों, दोनों के काम आता है और खपत तथा व्यापार की स्थिति का शुरुआती संकेत है।
- सितंबर की ज़्यादातर बढ़त आयात से और पिछले साल की दर कटौती के बाद के कम आधार से आई।
क्या अभी स्पष्ट नहीं है
- ये शुरुआती सरकारी आँकड़े हैं और इनमें संशोधन हो सकता है।
- वृद्धि का कितना हिस्सा टिकाऊ है और कितना आधार प्रभाव, यह अगले कुछ महीनों में साफ़ होगा।
तथ्य और प्रमाण
सितंबर 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 14.7% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
घरेलू संग्रह 10.1% बढ़कर लगभग ₹1.38 लाख करोड़ रहा; आयात पर जीएसटी 26% बढ़कर ₹65,525 करोड़ रहा।
रिफ़ंड ₹27,001 करोड़ रहे और शुद्ध संग्रह 18.1% बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
अप्रैल से सितंबर 2026 तक सकल संग्रह 11.6% बढ़कर ₹12.46 लाख करोड़ से ज़्यादा और शुद्ध संग्रह 10.4% बढ़कर ₹10.66 लाख करोड़ से ज़्यादा रहा।
सितंबर 2026-27 का तीसरा महीना रहा जब सकल संग्रह ₹2 लाख करोड़ से ऊपर गया; इससे पहले अप्रैल और जुलाई।
जीएसटी दरों का सरलीकरण (जीएसटी 2.0) 3 सितंबर 2025 को घोषित हुआ और 22 सितंबर 2025 से लागू हुआ।
स्रोत
DD News (Prasar Bharati): GST mop-up grows 15 pc to over Rs 2.03 lakh cr in Sep on buoyancy in imports, domestic sales (1 October 2026)आधिकारिक दस्तावेज़ · EN
आयात और घरेलू बिक्री के दम पर सितंबर में जीएसटी संग्रह 15% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ से ज़्यादा (1 अक्टूबर 2026)
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